हर्ष कालीन राजनीतिक स्थिति: एक अध्ययन
| Vol-4 | Issue-03 | March 2019 | Published Online: 13 March 2019 PDF ( 102 KB ) | ||
| Author(s) | ||
| प्रसून 1 | ||
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1एम॰ ए॰, एम॰ फिल, नेट इतिहास विभाग, मदवि, रोहतक |
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| Abstract | ||
छठी शताब्दी में उत्तर भारत में हर्षवर्धन एक कुशल साम्राज्य निर्माता होने के साथ-साथ एक योग्य प्रशासक भी था। बाणभट्ट की रचनाओं द्वारा तथा ह्वेनसांग की यात्रा विवरण से हमें हर्ष कालीन राजनीतिक स्थिति का पता चलता है। राजा प्रशासन का सर्वोच्च अधिकारी होता था। राजा में देवत्व का अंश समझा जाता था।वह प्राचीन शास्त्रों के आधार पर प्रजा की रक्षा करना और उसका पालन को अपना सर्वोच्च कार्य समझता था। इस समय में दिए गए भूमि अनुदानों से शक्ति बड़े-बड़े सैनिक अधिकारियों, सामंतों के हाथों में चली गई। प्रशासन में सामंतों को विशिष्ट स्थान दिया गया क्योंकि इन सामंतो के पास अपनी विशाल सेना थी। यह सामंत सेना के रूप में हर्ष की मदद करते थे। इससे केंद्रीय शक्ति कमजोर हुई और राजा को सेना के लिए सामंतों पर निर्भर होना पड़ा।इस समय दंड व्यवस्था कठोर थी तथा दंड स्वरूप शरीर के अंगों को काट लिया जाता था। हर्ष काल में बहुत ही कम करो को लगाया गया था। राजा को भूमि का मालिक समझने के कारण उसे उपज का एक भाग मिलता था जिसे ’भोग’ कहा जाता था। |
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| Keywords | ||
| प्रशासन, राजा, मंत्रीगण, सामंत, सेना, दंडव्यवस्था, राजस्व | ||
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