साहित्यकार शैलेश मटियानी जी की कथाद्रष्टि का अध्ययन

Vol-2 | Issue-7 | July 2017 | Published Online: 15 July 2017    PDF ( 483 KB )
Author(s)
Saroj Rani 1; Dr. Navneeta Bhatia 2

1Research scholar OPJS University, Churu (Rajasthan)

2Assistant Professor ,Hindi department,OPJS University Churu (Rajasthan)

Abstract

शैलेश मटियानी एक जनकथाकार के रूप में प्रसिद्ध हैं। शैलेश मटियानी आधुनिक हिन्दी साहित्य में नई कहानी के दौर के प्रसिद्ध जनकथाकार हैं। उनका सम्पूर्ण कथा साहित्य लगभग पांच दशकों तक विस्तार पाता है। मटियानी के कहानियों का बिस्मिल्लाह ‘रंगमहल’ एवं ‘अमर कहानी’ पत्रिका से होता है। ‘शांति ही जीवन है’ तथा ‘संघर्ष के क्षण’ इनकी प्रारम्भिक कहानियाँ है। मटियानी के पास कहानियों एवं उपन्यासों का विपुल भण्डार है। उन्होंने लगभग 250 कहानियाँ एवं 30 के आस-पास उपन्यासों की रचना की है। इसके अतिरिक्त लोककथा संग्रह, बाल साहित्य, आत्मकथा, संस्मरण, वैचारिक निबन्ध आदि मिलते है।शैलेश मटियानी एक प्रतिबद्ध लेखक थे। उनकी प्रतिबद्धता किसी विचारधारा के प्रति नहीं थी बल्कि उन भूखे, नंगे, गरीब और गलीज जिन्दगी जीते लोगों के प्रति थी, जिनकी जिन्दगी को उन्होंने बहुत करीब से देखा और महसूस किया था। किसी खास विचारधारा के प्रति प्रतिबद्धता कई बार एक तिकड़मी राजनीति में परिवर्तित होते हुए देखी गई है। इन सब के कारण मटियानी इसकेखिलाफ थे। किसी खास विचारधारा के प्रति प्रतिबद्ध लेखकों नेकभी सहज व स्वाभाविक रचनाएं दी हो जरूरी नहीं है। जबरचनाएँ विचारधारा को आत्मसात करके बोझढोती हुई सी नहींलगती तो उत्कृष्ट हो जाती हैं। मटियानी की रचनाओं में किसीतरह की कौशल व चालाकी की जगह संवेदना की सहजतानसुनाई पड़ती है तथा पाठकों को सहज ही उससे एक जुड़ाव काआकर्षित करती हैं।

Keywords
शैलेश मटियानी,हिन्दी साहित्य,जनकथाकार,आत्मकथा
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