संस्कृत नाटकों में निहित सांस्कृतिक सन्दर्भ
| Vol-5 | Issue-4 | April-2020 | Published Online: 16 April 2020 PDF ( 164 KB ) | ||
| DOI: https://doi.org/10.5281/zenodo.3822257 | ||
| Author(s) | ||
| हंसराज मीना 1; डाॅ. सहदेव शास्त्री 2 | ||
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1शोधार्थी, संस्कृत, स.ध. राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय,ब्यावर (राज.) 2शोध-निर्देशक, महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर (राज.) |
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| Abstract | ||
संस्कृति मानव जीवन की अमूल्य निधि होती है। किसी भी राष्ट्र का अस्तित्व उसकी संस्कृति के आधार पर अवलम्बित रहता है। संस्कृति किसी देश या जाति की आत्मा होती है। संस्कृति से ही उन सभी संस्कारों का बोध होता है जिनके सहारे मानव अपने सामाजिक जीवन के आदर्शो का निर्माण करता है इसलिए संस्कृति किसी एक युग की कृति न होकर विभिन्न युगों के मानव समूहों तथा समाज के सामूहिक प्रयत्नों का परिणाम होती है। |
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| Keywords | ||
| संस्कृति, आकर्षित, नितान्त, सुहृद, समकालीन। | ||
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