मनरेगा: पर्यावर्णीय सेवाएं एंव महिला सहभागिता सारांश

Vol-5 | Issue-2 | February-2020 | Published Online: 16 February 2020    PDF ( 232 KB )
DOI: https://doi.org/10.5281/zenodo.3801740
Author(s)
शाइस्ता बी 1

1शोध छात्रा, राजनीति विज्ञान विभाग, डीएसबी परिसर, नैनीताल।

Abstract

महात्मा गाॅधी राष्ट्रीय रोजगार गारेटी अधिनियम (मनरेगा) 2005, 7 सितम्बर  2005 को अधिसूचित किया गया था इस अधिनियम का उद्धेश्य ग्रामीण क्षेत्र के हर परिवार जिसके सदस्य स्वेछा से अकुशल श्रम करना चाहतेे हो, एक वित्तीय वर्ष में 100 दिन का गारंटीयुक्त मजदूरी रोजगार उपल्बध कराना है। मनरेगा द्वारा जो कार्य किये ता रहे है, जैसे - तालाब के चारों ओर पेड़ लगाना कब्रिस्तान में पेड लगाना, कुएँ और शैचालय निर्माण आदि पर्यावरर्णीय कार्य है। मनरेगा योजना के अनर्तगत कार्य करने वाले मंे लगभग 1/3 महिलाएँ का होना आवश्यक है। योजना मंें महिला को प्रार्थमिकता दी गई है। इसलिए मनरेगा योजना द्वारा कार्यरत महिलाएॅ पर्यावर्णीय कार्यो में सहभागिता निभा रही है। प्रस्ततु शोध पत्र पर्यावरर्णीय कार्यो मे किस प्रकार महिलाएँ अपनी सहभागिता निभा रही हे। इसका एक अवलोकन व विश्लेशण करने का प्रयास किया गया है।

Keywords
मनरेगा, महिलाएँ, पर्यावरण, अकुशल श्रम, प्रभाव
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