भारत में आधुनिकीकरण का प्रभाव-एक समाज वैज्ञानिक विश्लेषण

Vol-4 | Issue-6 | June 2019 | Published Online: 12 June 2019    PDF ( 241 KB )
Author(s)
बृजेश कुमार यादव 1

1शोधछात्र (समाजशास्त्र)काशी हिन्दू विश्वविद्यालय वाराणसी।

Abstract

समाज एवं संस्कृति में परिवर्तन एक शाश्वत प्रक्रिया है। दुनिया में सायद ही कोई ऐसा समाज हो जो इस परिवर्तन से अछुता हो। भारत में भी समयानुसार परिवर्तन होते रहे है। परन्तु भारत में और उसकी संरचना में परिवर्तन का प्रमुख कारण आधुनिकीकरण रहा है। भारत में आधुनिकीकरण का प्रमुख आधार पश्चिमीकरण की प्रक्रिया रही है। जिसका सूत्रपात ब्रिटिश आगमन के उपरान्त हुआ। आधुनिकीकरण के प्रक्रिया के परिणाम स्वरूप ही भारत के सामाजिक क्षेत्र में परिवर्तन हुआ, समाज में व्याप्त कुरितियाँ, प्रथाओं जैसे- सती प्रथा, खान-पान छुआ-छुत इत्यादि का अन्त करके। ब्रिटिश शासन काल में ही बाल विवाह, विधवा पुर्नविवाह, स्त्री सम्पत्ति अधिकार, सती प्रथा निषेध जैसे प्रगतिशील कानून बने जिससे परम्परागत भारतीय समाज में आधुनिकता का मार्ग प्रसस्त हुआ और भारत को एक समान कानून एवं न्याय व्यवस्था प्राप्त हुई। आधुनिकीकरण के परिणाम स्वरूप भारत में आर्थिक परिवर्तन के साथ-साथ राजनैतिक परिवर्तन भी हुए। भारत में लोग अपने परम्परागत व्यवसाय को छोड़कर कल कारखानों को तरफ अग्रसर हुए। 1990 में लिए आर्थिक फैसले ने भारत मंे विदेशीपूँजी का मार्ग प्रसस्त किया जिसने आर्थिक विकास हुआ। भारत में आधुनिकीकरण का प्रभाव यह हुआ कि भारतीय समाज ने राजशाही व्यवस्था को पुरी तरह नाकार दिया और लोकतान्त्रिक व्यवस्था को अपनाया गया। लोकतन्त्र में जनता का हित सर्वोपरी होता है। इसलिए जनसाधारण के हितों के लिए संविधान का निर्माण हुुआ जिसका परिणाम यह हुआ कि संविधान के कारण साधारण जनता भी अपने आप को सशक्तिकृत समझती है। आधुनिकीकरण के परिणाम स्वरूप भारत में सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक इत्यादि प्रकार के परिवर्तन हुए।

Keywords
आधुनिकीकरण का प्रभाव, सामाजिक प्रभाव, आर्थिक प्रभाव, राजनैतिक प्रभाव।
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