भारत की सुरक्षा परिषद की स्थाई सदस्यता के लिए चुनौतियाँ
| Vol-4 | Issue-04 | April 2019 | Published Online: 15 April 2019 PDF ( 220 KB ) | ||
| Author(s) | ||
| Dr. D.K. Pandey 1; Sh. Sohan Singh 2 | ||
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1HOD, Dept. of Defence & Strategic Studies, H.N.B. Garhwal University, (A Central University), Srinagar-Garhwal (Uttarakhand) 2Research Scholar, Dept. of Defence & Strategic Studies, H.N.B. Garhwal University, (A Central University), Srinagar-Garhwal (Uttarakhand) |
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| Abstract | ||
सुरक्षा परिषद संयुक्त राष्ट्र का मुख्य कार्यकारी अंग है। इसका प्रमख कार्य अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति एवं सुरक्षा बनाये रखना है। जब भी किसी संघर्ष से विश्व शान्ति के लिए खतरा पैदा होता है तब सुरक्षा परिषद इसके लिए हर संभव कदम उठाने के लिए स्वतंत्र है। सुरक्षा परिषद की प्रथम बैठक 17 जनवरी, 1946 को लंदन के वेस्टमिन्स्टर में आयोजित की गई। इसके 05 स्थाई और 10 अस्थाई सदस्य हैं। विश्व में निरन्तर संघर्षाें की प्रकृति में बदलाव होने से सुरक्षा परिषद का वर्तमान ढ़ाँचा इन नई उभरती हुई समस्याओं का समाधान करने में असफल है। इसलिए इसे और अधिक प्रजातान्त्रिक बनाए जाने की आवश्यकता है जिससे यह अपनी विश्वसनीयता को बनाये रख सके। प्रस्तुत शोध पत्र में सुरक्षा परिषद में सुधार की आवश्यकता, इसकी सदस्यता के लिए भारत के दावों और स्थाई सदस्यता के मार्ग में आने वाली प्रमुख चुनौतियों पर प्रकाश डाला गया है। |
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| Keywords | ||
| सुरक्षा परिषद, स्थाई सदस्यता, भारत, संयुक्त राष्ट्र, चुनौती, सुरक्षा, शान्ति, अभियान आदि। | ||
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