प्रवासी घरेलू समूहों में उत्प्रवाह के उपयोग एवं प्रभाव का तुलनात्मक अध्ययन

Vol-6 | Issue-02 | February-2021 | Published Online: 14 February 2021    PDF ( 476 KB )
DOI: https://doi.org/10.31305/rrijm.2021.v06.i02.012
Author(s)
Ish Shakti Singh 1

1Ph.D. Research Scholar, Department of Migration and Diaspora Studies, Mahatma Gandhi Antarrashtriya Hindi Vishwavidyalaya, Wardha

Abstract

प्रवासन एक प्रक्रिया और साथ ही सामाजिक-आर्थिक प्रघटना है। तत्कालीन प्रवासन का दौर आजीविका दृष्टिकोण से ज्यादा महत्वपूर्ण है। इसलिए प्रवासन रणनीति घरेलू आजीविका और अर्थव्यवस्था में बदलाव के लिए लिया जाता है। प्रवासन के प्रतिफल में घरेलू समूहों को उत्प्रवाह का स्त्रोत प्राप्त होता है। आर्थिक उत्प्रवाह वह बाह्य वित्त साधन है जो सूक्ष्म स्तर पर घरेलू अर्थव्यवस्था के बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस पत्र का उद्देश्य घरेलू समूह में उत्प्रवाह का उपयोग कहाँ और कैसे किया जा रहा है एवं शिक्षा, रोजगार, आवास सुविधा पर प्रभाव का खोज करना है। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय और आतंरिक प्रवासी घरेलू समूहों में तुलनात्मक अध्ययन किया गया है। अध्ययन में उद्देश्यपूर्ण निदर्शन द्वारा उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के सोहांव ब्लॉक के अंतर्गत चौरा गांव से 45 अंतरराष्ट्रीय प्रवासी घरेलू समूह और 45 आतंरिक प्रवासी घरेलू समूहों सहित 90 प्रतिभागियों से साक्षात्कार-अनुसूची के द्वारा आंकड़ों को प्राप्त कर विश्लेषण किया गया है। उद्देश्य की प्रकृति के आधार पर अध्ययन वर्णनात्मक शोध की है। अध्ययन से प्राप्त परिणामों के आधार पर अंतरराष्ट्रीय और आतंरिक उत्प्रवाह का घरेलू समूह के उपयोग की क्षमता अलग-अलग है। घरेलू आजीविका और अर्थव्यवस्था में जितना प्रभावकारी परिणाम अंतरराष्ट्रीय उत्प्रवाह का पड़ रहा है उतना आतंरिक उत्प्रवाह का नहीं है। अंतरराष्ट्रीय उत्प्रवाह घरेलू समूह के उपयोग और प्रभाव के रूप में अत्यधिक विकास की रणनीति बनाने में सहयोग दे रहा है। जहां एक तरफ आतंरिक उत्प्रवाह अत्यधिक घरेलू समूह की आजीविका तक सिमित होकर रह गई है वहीं अंतरराष्ट्रीय उत्प्रवाह आजीविका से आगे बढ़कर घरेलू समूह की स्थायी अर्थव्यवस्था का निर्माण करने में अपनी भूमिका निभा रहा है।

Keywords
आतंरिक प्रवासन, अंतरराष्ट्रीय प्रवासन, प्रवासी, उत्प्रवाह, घरेलू समूह
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