पुराण संस्कृत साहित्य का विवेचन
| Vol-4 | Issue-5 | May 2019 | Published Online: 25 May 2019 PDF ( 216 KB ) | ||
| Author(s) | ||
| निर्मला देवी 1 | ||
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1शोधार्थी, संस्कृत विभाग, बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय, अस्थल बोहर, रोहतक |
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| Abstract | ||
भारतीय उपमहाद्वीप में विचार-विनिमय हेतु उपयोग में लायी गयी ज्ञात भाषाओं में सबसे प्राचीन संस्कृत भाषा है। जिसके सामान्यतः दो रूप हैं, वैदिक संस्कृत तथा लौकिक संस्कृत। वैदिक संस्कृत या प्राचीन संस्कृत का उपयोग वेद (ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद, अथर्वेद), पुराण, उपनिषद में देखने को मिलता है। पणिनि ऋषि से पूर्व की लगभग सभी रचना वैदिक संस्कृत में मिलती हैं। यह भारोपीय (इंडो-यूरोपीय) भाषा इरानियों के पवित्र ग्रन्थ अवेस्ता की भाषा के निकटवर्ती प्रतीत होती है। वैदिक साहित्य और लौकिक साहित्य का सेतु पुराणसाहित्य है। अत इस लेखन में पुराण संस्कृत साहित्य के विवेचन का सत्प्रयास है। संस्कृत सर्व भाषायां जननी अस्ति। |
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| Keywords | ||
| पुराण संस्कृत साहित्य | ||
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