पंचायती राज एवं महिला नेतृत्व विकास – एक विमर्श

Vol-3 | Issue-10 | October 2018 | Published Online: 10 October 2018    PDF ( 660 KB )
DOI: https://doi.org/10.5281/zenodo.1461133
Author(s)
डॉ. राजेश कुमार 1

1पी.एच.डी., (जे.आर.एफ.), राजनीति विज्ञान विभाग, सामाजिक विज्ञान संकाय, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी- 221005 भारत

Abstract

"पंचायती राज संस्थाओ में महिला नेतृत्व विकास वर्तमान भारत का एक बेहद जरुरी विमर्श है | चुकि यह महिला स्वतंत्रता, समानता, मजबूती और महत्ता की हिमायत करता है, इसलिए इसे सम्पूर्ण मानव समाज के आधे हिस्से की बेहतरी से जुड़ा विमर्श कहा जा सकता है | इस बेहतरी की स्थापना हेतु भारत में स्थानीय स्वायत्त संस्थाओ की विकेंद्रीकरण प्रणाली प्रारम्भ की गयी | यह विकेंद्रीकरण जमीनी स्तर पर हुआ है तथा इन संस्थाओ में महिलाओ के लिए एक-तिहाई स्थान आरक्षित (वर्तमान में कई राज्यों में 50 प्रतिशत) किये जाने से जमीनी स्तर पर काफी बदलाव हुए है | आज भारत में 12 लाख से अधिक महिला निर्वाचित प्रतिनिधि है जो दुनिया के किसी भी देश में नही है | इतना ही नहीं अगर पूरी दुनिया के निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की संख्या जोड़ी जाये तो वह संख्या इन भारतीय निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों से कम ही है | देखा जाय तो पंचयतो में महिला नेतृत्व विकास एक एसी मौन क्रांति का द्योतक है जो अभि राष्ट्रिय स्तर पर सार्वजनिक रु से भेल ही दिखाई नहीं दे रही हो पर उसकी धीमी आँच भारतीय लोकतंत्र को अवश्य मजबूत बना रही है | यह क्रांति देश के सत्ता-विमर्श के ढांचे में ही वदलाव नहीं ला रही है बल्कि पंचायत स्तर पर इतनी बड़ी संख्या में महिलाओ की भागीदारी ने स्थानीय स्तर पर सामुदायिक जीवन और उसकी चेतना तह संस्कृति में भी परिवर्तन लाया है | इन निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों ने सत्ता के जातीय समीकरण को ही नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक समीकरण को भी बदल है | ग्राम सभा से लेकर संसद तक राष्ट्रीय स्तर पर महिलाओ की भागीदारी दिनोंदिन बढती जा रही है | अब स्थिति यह है कि पंचायतो में भागीदारी होने के साथ ही उनकी आत्मनिर्भरता भी बढ़ी है | उनमे जागरूकता भी आयी है | और वो छोटे-छोटे स्वयं सहता समूहों के जरिये अपना स्वरोजगार अपना रही है और देश के राष्ट्रीय विकास में अपना सहयोग भी दे रही है | इस तरह यह कहना गलत नहीं होगा कि पंचायतो से ही महिलाओ के राजनितिक एव सशक्तिकरण अभियान को गति मिली है | जब पंचायतो में उनकी भागीदारी बढ़ी तभी वे हर दिशा में आए निकल पायी है| अब तो संसद तक में उन्हें आरक्षण देकर उनके नेतृत्व विकास को प्रोत्साहित किया जा रहा है |"

Keywords
पंचायती राज, महिला सशक्तिकरण, नेतृत्व विकास, राजनितिक प्रतिनिधित्व व सहभागिता, लोकतांत्रिक विकेन्द्रीकरण, सामाजिक परिवर्तन, निर्णय-निर्माण एवं क्रियान्वयन |
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