निर्मलवर्मा का ‘वे दिन’ उपन्यास की भाषा शैली
| Vol-4 | Issue-04 | April 2019 | Published Online: 15 April 2019 PDF ( 472 KB ) | ||
| Author(s) | ||
डॉ.ए.सी.वी.रामकुमार
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1पूर्वसहायक प्राध्यापक, हिंदी विभाग, तमिलनाडु केंद्रीय विश्वविद्यालय, तमिलनाडु, भारत। |
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| Abstract | ||
भावों और विचारों की सफलता और सूक्ष्मतम अभिव्यक्ति की सर्वाधिक सशक्त तथा व्यावहारिक माध्यम भाषा है। किसी कृति का जिस प्रकार वस्तुपक्ष को लेकर अध्ययन किया जाता है, उसी प्रकार उस कृति के सम्यक अध्ययन के लिए उसकी भाषाशैली पक्ष को भी देखना आवश्यक हो जाता है। निर्मल वर्मा आधुनिक उपन्यासकार हैं, अर्थात् उनका उपन्यास ‘वे दिन’ में विभिन्न भाषाओं के प्रचलित शब्दों, उक्तियों, कहावतें, मुहावरे, विशिष्ट वाक्यों का प्रयोग देखने को मिलता है। जिसका वर्णन निर्मल वर्मा ने अपने 'वे दिन' उपन्यास में गंभीरता से प्रस्तुत की। |
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| Keywords | ||
| भाषाशैली, दृश्यात्मक भाषा, शिल्पविधान, चेक भाषा का प्रयोग, अंग्रेजी शब्दों का चयन, अरबी फारसी शब्दों का प्रभाव, वे दिन उपन्यास, साहित्यकार निर्मलवर्मा आदि। | ||
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