“त्रयउपस्तम्भ” (स्वस्थ जीवन का आधार)
| Vol-5 | Issue-7 | July-2020 | Published Online: 30 July 2020 PDF ( 205 KB ) | ||
| DOI: https://doi.org/10.31305/rrijm.2020.v05.i07.035 | ||
| Author(s) | ||
| Santosh Rani 1 | ||
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1M.A. Yoga (Net),Dept. of Phy.Education, Chaudhary Ranbir Singh University, Jind |
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| Abstract | ||
विश्व की सभी संस्कृतियों में भारत संस्कृति न केवल प्राचीनतम ही है, हमारी इस गौरवपूर्ण संस्कृति और सभ्यता के मूल स्त्रोंत और आधार वेद है। वेदों में मानव जाति के सभी प्रकार के आयुर्वेदिक रहस्यों का वर्णन मिलता है। वेद चार है - ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अर्थर्ववेद। संसार का सबसे प्राचीन चिकित्सा एवं स्वास्थय सम्बन्धी शास्त्र आयुर्वेद है। जो कि अथर्ववेद का उपवेद माना जाता है। दुसरे वेदों की अपेक्षा अर्थर्ववेद की लम्बी आयु व चिकित्सा सम्बन्धी सभी उपदेश मिलते है। |
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| Keywords | ||
| संस्कृति आयुर्वेद अर्थर्ववेद चिकित्सा | ||
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