गुप्तकाल में विज्ञान का योगदान
| Vol-6 | Issue-11 | November-2021 | Published Online: 25 November 2021 PDF ( 183 KB ) | ||
| DOI: https://doi.org/10.31305/rrijm.2021.v06.i11.009 | ||
| Author(s) | ||
विभा राव
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1शोध छात्रा, प्राचीन इतिहास विभाग, वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर। |
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| Abstract | ||
प्राचीन भारतीय इतिहास में गुप्तकाल को विज्ञान और प्रौद्योगिकी का चरमोत्कर्ष काल माना जाता है । इस काल में विज्ञान के विभिन्न शाखाओ ( भौतिक विज्ञान , रसायन विज्ञान , चिकित्सा व जीव विज्ञान तथा धातु विज्ञान आदि ) में अभूतपूर्व उन्नति हुई जो आधुनिक समाज में भी उपयोगी सिद्ध हो रही है । गणित , ज्योतिष में भी गुप्तकाल का महत्वपूर्ण योगदान रहा है खगोल विज्ञान , धातु विज्ञान व प्रौद्योगिकी के क्षेत्र मे गुप्तकाल अपनी अलग पहचान बनाये हुए है । शून्य का आविष्कार , पाई का मान , चिकित्सा में धातू का प्रयोग तथा शल्य चिकित्सा गुप्तकाल की अविस्मरणीय देन है । धातुओ से विभिन्न आभूषणों का निर्माण व सिक्का ढालने की कला इस काल में विकसित हो चुकि थी । मूर्ति निर्माण कला तथा वास्तुकला में इस काल के लोग पारन्गत थे । अजन्ता व एलोरा की गुफाएं, भूमरा का शिव मन्दिर , देवगढ़ का दशावतार मंदिर , सारनाथ का धमेख स्तूप इसके कुछ उत्कृष्ठ उदाहरण है । |
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| Keywords | ||
| गुप्तकाल , विज्ञान, चिकित्सा, गणित, ज्योतिष | ||
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