आंचलिक हिंदी पत्रकारिता में साहित्य

Vol-2 | Issue-11 | November 2017 | Published Online: 30 November 2017    PDF ( 172 KB )
Author(s)
सुदीप शुक्ला 1

1शोधार्थी, एस.एस.एल. जैन पीजी कॉलेज विदिशा

Abstract

प्रसिद्ध उक्ति है कि ‘साहित्य समाज का दर्पण है।‘ किसी भी समाज को हम उसके साहित्य से जान सकते हैं। साहित्य का प्रकाशन पुस्तकों के साथ पत्र-पत्रिकाओं में भी होता है। आंचलिक हिंदी पत्रकारिता के आरंभ से पिछले एक-डेढ़ दशक तक समाचार पत्र-पत्रिकाओं की प्रतिष्ठा इस बात से भी होती थी कि वह किस प्रकार का साहित्य प्रकाशित करते हैं। अब बाजारवाद और विज्ञापनवादी युग में साहित्य का कोना समाचार पत्र पत्रिकाओं से सिमटता जा रहा है। प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं अब सप्ताह में 1-2 कविता कहानी ही पाठकों को पढ़ने मिल रहे हैं। यह स्थिति साहित्य के लिए तो चिंताजनक है ही साथ ही समाचार पत्र पत्रिकाओं के लिए भी चिंता का कारण है।

Keywords
आंचलिक हिंदी पत्रकारिता, बाजारवाद, विज्ञापनवादी
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