पंजाबी संगीतकारों और विद्वानों का संगीत के प्रकाशन में योगदान
| SL-RCTRM-2018 | Special Issue | OCT-2018 | Published Online: 20 October 2018 PDF ( 213 KB ) | ||
| Author(s) | ||
| रमनदीप कौर 1 | ||
|
1शोधार्थी पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला |
||
| Abstract | ||
पंजाब भारत का एक खुशहाल प्रान्त है जिसकी संस्कृति को भारतीय संस्कृति का मूल आधार माना जाता है। पंजाब प्रान्त ने आरम्भ से ही भारतीय संस्कृति ओर कलाओं में प्रतिनिधित्व किया है। कलाओं में संगीत कला के प्रसार ओर प्रचार में पंजाब ओर पंजाबी संगीतकार विद्वानों का योगदान सराहनीय रहा हैं। पंजाब की धरती ने भारतीय संगीत को अनेक कलाकार संगीतकार दिए जिन्होंने भारतीय संगीत की विभिन्न धाराओं (लोक संगीत, शास्त्रीय संगीत, उप-शास्त्रीय संगीत, गुरमति संगीत, सूफी संगीत ओर सुगम संगीत आदि) को प्रसारित करने में अहम योगदान दिया। इसमें कोई संदेह नहीं कि इन संगीतकारों ने संगीत के क्रियात्मक पक्ष को अधिक प्रसारित किया। देखा जाए तो सैद्वातिंक पक्ष के अभाव से किसी भी कला या संस्कृति के बिखरने का डर रहता है। आरम्भ से ही पंजाबी संगीतकार संगीत के सैद्वान्तिक पक्ष को प्रचारित करने में कम सफल रहे थे यही कारण रहा कि पंजाबी संगीतकारों के भारतीय संगीत को योगदान को गैर-पंजाबी लेखकों ने उस तरह नहीं दर्शाया जितना दर्शाया जाना चाहिए था। इस शोध पत्र में पंजाब के संगीतकार विद्वानों द्वारा भारतीय संगीत के प्रकाशन क्षेत्र में दिए गए योगदान पर विशेष चर्चा की गई है। |
||
| Keywords | ||
| भारतीय संस्कृति गुरमति संगीत, सूफी संगीत | ||
|
Statistics
Article View: 1598
|
||

