संसद में अम्बेडकर: बुनियादी ज़रूरतों से लेकर बुनियादी अधिकारों तक

Vol-4 | Issue-01 | January 2019 | Published Online: 20 January 2019 PDF
Author(s)
मुकेश कुमार सबलानिया 1

1शोधकर्ता, सेंटर फॉर दा स्टडी ऑफ़ सोशल एक्सक्लूशन एंड इंक्लूसिव पॉलिसी, जामिया मिलिया इस्लामिया नई दिल्ली

Abstract

संसद में अंबेडकर लेख केवल एक ऐतिहासिक प्रसंग नहीं बल्कि भारतीय लोकतांत्रिक चेतना की जीवंत परंपरा का प्रतीक है। अंबेडकर ने संसद को मात्र कानून बनाने की संस्था ही नहीं समझा परंतु उनके लिए संसद एक माध्यम था जिससे वह दलितों के जीवन में सुधार ला सकते थे। इसी संसद में पहले कानून मंत्री तथा बाद में विपक्ष के नेता के रूप में उन्होंने अनेक ऐसे कार्य किए जो आज भी दलितों तथा पिछड़ी जातियों के सुधार में कारगर साबित हो रहें हैं। उनके लिए संसद एक प्रयोगशाला की तरह थी जिसमें उन्होंने संवैधानिक अधिकारों के बल पर संपूर्ण भारतवासियों के लिए अधिकारों की मांग की जिसमें हिंदू कोड बिल को अग्रणी स्थान प्राप्त है। इस लेख के माध्यम से लेखक अंबेडकर के जीवन के उस पहलू पर रोशनी डालने की कोशिश कर रहे हैं जिसमें उन्होंने संसद में रहते हुए भारत को एक लोकतांत्रिक देश बनाने में पूर्ण योगदान दिया है।

Keywords
संसद, अंबेडकर, संविधान, शुद्र, हिन्दू कोड बिल, राष्ट्र
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