व्यवसाय में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी: सामान्य अवलोकन

Vol-6 | Issue-07 | July-2021 | Published Online: 15 July 2021 PDF
DOI: https://doi.org/10.31305/rrijm.2021.v06.i07.029
Author(s)
Dr Pramod Kumar Dhayal 1

1Associate Professor, S.R.R.M Government College, Jhunjhunu, Rajasthan

Abstract

महिलाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित कर उन्हें सक्षम बनाने वाले नीतिगत ढाँचे का निर्माण किया जाना चाहिये, जहाँ महिलाओं के समक्ष आने वाली लैंगिक बाधाओं के प्रति सक्रिय जागरूकता मौजूद हो। इस क्रम में लैंगिक असमानता को दूर करने वाली प्रभावी नीतियों को विकसित किये जाने की आवश्यकता है। यदि महिलाएँ आर्थिक रूप से पुरुषों के बराबर हों तो इसके सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं। उदाहरण के लिये, 50 प्रतिशत से अधिक महिलाओं के पास सेलफोन नहीं है और 80 प्रतिशत सेलफोन उपयोगकर्ता् महिलाओं के पास इंटरनेट तक पहुँच की कमी है (वर्ष 2016 का आँकड़ा)। अगर महिलाओं के पास भी पुरुषों के समान ही समुचित संख्या में फोन हों तो यह अकेले ही अगले पाँच वर्षों में फोन कंपनियों के लिये 17 बिलियन डॉलर का राजस्व पैदा कर सकती है। इसके लिये शिक्षा और कौशल विकास प्रणाली में महिलाओं की उपस्थिति में भी महत्त्वपूर्ण सुधार करना होगा। डेलॉइट (Deloitte) के एक अध्ययन, जिसमें भारत के लैंगिक असंतुलन के निवारण के लिये चतुर्थ औद्योगिक क्रांति (Industry 4.0) की क्षमता पर विचार किया गया था, में भी लगभग यही निष्कर्ष प्रस्तुत किया गया। महिलाओं के समक्ष विद्यमान निराशाजनक आर्थिक असमानता के परिदृश्य में परिवर्तन लाने की आवश्यकता है क्योंकि वे अर्थव्यवस्था में सबसे अधिक योगदान दे सकती हैं। भारत की महिलाओं की क्षमताओं को उजागर किये जाने से ही भारत की आर्थिक क्षमता को पूर्ण रूप से साकार किया जा सकता है।

Keywords
व्यापार, अर्थव्यवस्था, महिलाओं, आर्थिक असमानता।
Statistics
Article View: 169