अन्तर्जातीय विवाह की सैद्धान्तिक पृष्ठभूमि: भारतीय समाज के विशेष संदर्भ में

Vol-2 | Issue-7 | July 2017 | Published Online: 15 July 2017    PDF ( 100 KB )
Author(s)
डाँ बलवीर सेन 1

1सह-आचार्य (समाजशास्त्र) राजकीय महाविद्यालय, मेड़ता सिटी, नागौर (राज0)

Abstract

‘‘अन्तर्जातीय विवाह‘‘ के अन्तर्गत विवाह तथा जाति दो मूलभूत संस्थाएं आपस में जुड़ी हुई है तथा ये दोनों संस्थाएं भारतीय समाज की आधारशिला है इसलिए इन दोनों का अध्ययन आवश्यक है। भारतीय सामाजिक व्यवस्था का संस्तरणात्मक क्रम ‘‘वर्ण‘‘ पर आधारित रहा है। कालान्तर में इसका स्थान जाति व्यवस्था ने ले लिया। जाति व्यवस्था हिन्दू सामाजिक संरचना का एक प्रमुख आधार रहा है जिसने हिन्दुओं के सामाजिक, आर्थिक राजनीतिक एवं सांस्कृतिक जीवन को अपने रूपों में प्रभावित किया है।

Keywords
विवाह, भारत अन्तर्जातीय।
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