शाहजहां का शासनकाल: मुगलकाल का स्वर्ण-युग

Vol-4 | Issue-02 | February 2019 | Published Online: 20 February 2019    PDF ( 115 KB )
Author(s)
संध्या रानी 1

1यू॰जी॰सी॰ नेट, इतिहास कानपुर, उ॰प्र॰, भारत

Abstract

शाहजहां का शासनकाल (1628-1658) मुगलकाल का स्वर्ण युग कहलाता है, क्योंकि इस अवधि में प्रत्येक क्षेत्र में विशेष उन्नति हुई और साम्राज्य अपने गौरव के शिखर पर जा पहुंचा। शाहजहाँ के राज्यकाल में वे सारी विशेषताएँ विद्यमान थीं, जिनके आधार पर उसके शासनकाल को स्वर्ण-युग कहा जा सकता है। राजनीतिक दृष्टिकोण से शाहजहां के युग में शांति, सुरक्षा और मैत्री का वातावरण था और किसी प्रकार के आन्तरिक विद्रोह का भय नहीं था। राजपूत राज्य के हितैषी, मित्र तथा शुभचिन्तक बन चुके थे। मेवाड़ का राणा एक प्रकार से मुगल मनसबदार बन चुका था। उत्तर-पश्चिम में कन्धार के अतिरिक्त समस्त मुगल प्रदेश पूर्णरूप से सुरक्षित थे। काबुल मुगल साम्राज्य का अंग बन चुका था और उसमें अन्य राज्यों जैसी शासन-व्यवस्था विद्यमान थी। दक्षिण भारत में मुगल प्रभुत्व का बोलबाला रहा। मराठे शक्तिशाली नहीं हुए थे। अतः मुगलों को उनकी ओर से कोई खतरा नहीं था। पुर्तगालियों का पतन हो चुका था। संक्षेप में, शाहजहां के राज्य में पूर्ण सुख-शान्ति थी और देश आन्तरिक तथा विदेशी आक्रमणों से सुरक्षित था।

Keywords
मेवाड़, शाहजहां, टेªवर्नियर, भू-राजस्व, चित्रकला।
Statistics
Article View: 443