भूमंडलीय ऊष्मीकरण (ग्लोबल वार्मिंग) का जलवायु परिवर्तन पर प्रभाव
| Vol-6 | Issue-07 | July-2021 | Published Online: 15 July 2021 PDF ( 202 KB ) | ||
| DOI: https://doi.org/10.31305/rrijm.2021.v06.i07.013 | ||
| Author(s) | ||
| डाॅ0 निधि सिंह 1 | ||
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1असिस्टेंट प्रोफेसर, भूगोल विभाग, आर 0 आर 0 पी0जी0 कालेज, अमेठी. उ0 प्र0 |
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| Abstract | ||
ग्लोबल वार्मिंग दुनिया की कितनी बड़ी समस्या है, यह बात एक आम आदमी समझ नहीं पाता है। उसे ये शब्द थोड़ा टेक्निकल लगता है। इसलिये वह इसकी तह तक नहीं जाता है। लिहाजा इसे एक वैज्ञानिक परिभाषा मानकर छोड़ दिया जाता है। ज्यादातर लोगों को लगता है कि फिलहाल संसार को इससे कोई खतरा नहीं है। भारत में भी ग्लोबल वार्मिंग एक प्रचलित शब्द नहीं है और भाग-दौड़ में लगे रहने वाले भारतीयों के लिये भी इसका अधिक कोई मतलब नहीं है। लेकिन विज्ञान की दुनिया की बात करें तो ग्लोबल वार्मिंग को लेकर भविष्यवाणियाँ की जा रही हैं। इसको 21वीं शताब्दी का सबसे बड़ा खतरा बताया जा रहा है। यह खतरा तृतीय विश्वयुद्ध या किसी क्षुद्र ग्रह (एस्टेराॅइड) के पृथ्वी से टकराने से भी बड़ा माना जा रहा है। |
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| Keywords | ||
| ग्लोबल वार्मिंग के कारण होने वाले जलवायु परिवर्तन | ||
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