राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ में विद्यालयी शिक्षा में पाठ्यक्रम और शिक्षण शास्त्र

Vol-6 | Issue-07 | July-2021 | Published Online: 15 July 2021    PDF ( 168 KB )
DOI: https://doi.org/10.31305/rrijm.2021.v06.i07.012
Author(s)
डा. नाहर सिंह 1

1संयुक्त निदेशक (शैक्षिक) एस.सी.ई.आर.टी, नई दिल्ली

Abstract

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है जो शैक्षिक परिप्रेक्ष्य में आमूलचूल परिवर्तन की दिशा निर्धारित करता है। इसमें विद्यार्थियों में प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा विषयवस्तु की समझ को बढ़ाने पर विशिष्ट बल दिया गया हैै। विद्यार्थियों को कोर्स चयन में शारीरिक शिक्षा, कला और शिल्प और व्यावसायिक शिक्षा के विभिन्न विकल्प प्रदान किए जाने और ’पाठ््यक्रम’, ’अतिरिक्त पाठ्यक्रम या सह पाठ्यक्रम’, ’कला’, ’मानविकी और विज्ञान’ अथवा ’व्यावसायिक’ या ’अकादमिक’ इत्यादि श्रेणियों को समाप्त करने की बात कही गई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में विद्यार्थियों को बहुभाषिकता के अवसर प्रदान किए जाएंगे। फाउंडेशनल स्टेज और प्रिपेयेटरी स्टेज पर शिक्षा का माध्यम मातृृभाषा/घर की भाषा/स्थानीय भाषा होगी। बहुभाषिकता को सुलभ बनाने हेतु उच्चतर गुणवŸाा वाली विज्ञान और गणित में द्विभाषी पाठ्यपुस्तकों और शिक्षण-अधिगम सामग्री को तैयार करने के प्रयास किए जाएंगे। वैश्विक परिदृश्य में बदलते परिवर्तनों हेतु तैयार करने के लिए कुछ विषयों, कौशलों और दक्षताओं के सीखने पर विशिष्ट ध्यान दिया जाएगा। सभी विद्यार्थियों के लिए दस दिन बस्ता रहित पीरियड की व्यवस्था होगी ताकि वे इस दौरान स्थानीय व्यावसायिक विशेषज्ञों के साथ कार्य कर सके। रचनात्मक शिक्षण अधिगम प्रक्रिया को सुनिश्चित करने हेतु रचनात्मक आंकलन को महत्व दिया गया है जिसमें प्रगति कार्ड एक समग्र, 360 डिग्री और बहुआयामी होगा जिसमें प्रत्येक विद्यार्थी के सृजनात्मक, भावात्मक और कौशलात्मक क्षेत्रों के विकास के विश्लेषण का विस्तृृत विवरण होगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में विद्यालयी शिक्षा में पाठ्यक्रम और शिक्षण संबंधी महत्वपूर्ण बातें कही गई हैं जिनके क्रियान्वयन में अंतर्भेद दृृष्टिगत होते हैं जिसमें बच्चे की ’मातृभाषा’ और ’घर की भाषा’, स्थानीय भाषा से भिन्न हो सकती है। उदाहरण के लिए प्रवासीें और आदिवासी परिवार। नई शिक्षा नीति 2020 एक मील का पत्थर है जिसके लक्ष्यों की संप्राप्ति हेतु समुचित क्रियान्वयन की महती आवश्यकता है।

Keywords
विद्यालयी शिक्षा, पाठ्यक्रम और शिक्षण शास्त्र
Statistics
Article View: 475