भुन्डाडीह, चन्दौली (यू.पी.) के सर्वेक्षण से प्राप्त अवशेषः एक प्रतिवेदन
| Vol-6 | Issue-05 | May-2021 | Published Online: 15 May 2021 PDF ( 849 KB ) | ||
| DOI: https://doi.org/10.31305/rrijm.2021.v06.i05.024 | ||
| Author(s) | ||
डा0 संजय कुमार कुशवाहा
1
|
||
|
1एसि0 प्रोफेसर, प्राचीन इतिहास विभाग, एस. पी. एम. कालेज, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज |
||
| Abstract | ||
इतिहास की धारा तथ्यों पर सवार होकर आगे बढ़ती है अब चाहे यह तथ्य साहित्यिक स्रोत के रूप में हो या पुरातात्विक स्रोत के रूप में हो, लेकिन जो तथ्य मानव से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े होते हैं उनकी महत्ता अपेक्षाकृत अत्यधिक होती है। ऐसे तथ्यों या स्रोतों को पुरातत्विक सर्वेक्षण एवं उत्खनन के माध्यम से प्राप्त किया जाता है। वर्तमान समय में आपने बहुत से ऐसे स्थान देखे होंगे जो प्राकृतिक सतह से कुछ ऊंचे होते हैं ऐसे स्थानों को वहां के निवासियों के द्वारा कोट या डीह की और पुरातत्व के जानकार लोगों के द्वारा इसे टीला की संज्ञा दी जाती है। इस तरह के कोट, डीह या टीले का निर्माण उस स्थान पर रहने वाले लोगों के पूर्वजों या उससे पहले वहां निवास करने वाले मानवों के द्वारा छोड़े गए संरचनात्मक एवं भौतिक अवशेषों के नीचे दबते जाने के क्रम में होता हैं। इनमें से कुछ कोट या टीले वीरान हो जाते हैं लेकिन कुछ टीलों को ग्रामीणों के द्वारा काट दिया जाता है और कुछ को डर सुरक्षित छोड़ दिया जाता है। ऐसे ही स्थानों की खोज सर्वेक्षण के माध्यम से पुरातत्वविद के द्वारा किया जाता है और वहां सतह से प्राप्त अवशेषों के आधार पर पुरास्थल की संज्ञा देता है। ये पुरास्थल प्राकृतिक बदलावों और मानव की कहानी की दास्तां को बयां करते हैं। पृथ्वी के ऊपर होने वाले प्राकृतिक बदलावों के परिणाम स्वरूप जीवो का उद्भव हुआ उन्ही जीवों में मानव का भी उद्भव हुआ। मानवीय क्रियाकलापों और गतिविधियों के परिणाम स्वरूप पुरास्थल का निर्माण टिलांे के रूप में हुआ जो अपने अंदर एक निश्चित क्षेत्र के अंदर रहने वाले लोगों की जीवन गाथा को संजोये हुए होते हैं, ऐसे ही पुरास्थलों में एक पुरास्थल भुन्डाडीह (अ¨नावल)भी है जहां से बहुत से पुरातात्विक अवशेष प्राप्त हुए हैं जो इस पुरास्थल की महत्ता को बढ़ाते हैं। इस पुरास्थल के बारे में ग्रामीण¨ं द्वारा बात करने पर पता चला है कि यहाँ पर साधु ल¨ग निवास करते थ्¨ं वे अपने सर के बाल¨ क¨ हमेशा मुडाये रहते थ्¨ जिससे उनको ’भुन्डा’ कहा जाने लगा अ©र बाद इन साधु ल¨ग¨ं के रहने वाल्¨ स्थान क¨ ‘भुन्डाडीह’ कहाँ जाने लगा। |
||
| Keywords | ||
| इतिहास, पुरातात्विक स्रोत, टीले, पुरास्थल | ||
|
Statistics
Article View: 419
|
||


