अमीर खुसरो और जायसी के काव्य में तत्कालीन समाज

Vol-5 | Issue-4 | April-2020 | Published Online: 16 April 2020    PDF ( 660 KB )
Author(s)
देवेन्द्र सिंह 1

1शोधार्थी, हिन्दी विभाग राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर।

Abstract

"साहित्य समाज का दर्पण होता है" यह उक्ति अमीर खुसरो और मलिक मुहम्मद जायसी के काव्य में अक्षरषः लागू होती है। अमीर खुसरो ने अपनी कविता में एक ओर जनमानस से जुड़ने के लिए हिन्दी को अपनाया वहीं उन्होंने समाज में प्रचलित बोलचाल, व्यवहार, खानपान, रिष्ते-नाते आदि सभी सामाजिक और सांस्कृतिक तत्वों को अपनी कविता में स्थान दिया और उसे आम आदमी के हृदय की अभिव्यक्ति बना दिया।

Keywords
जनमानस, जायसी, काव्य, प्रचलित, सामाजिक, सांस्कृतिक
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