भारतीय लोकतंत्र एवं चुनाव सुधारः चुनौतियां एवं संभावनाएं
| Vol-3 | Issue-05 | May 2018 | Published Online: 24 May 2018 PDF ( 167 KB ) | ||
| Author(s) | ||
| डॉ अमिताभ त्रिवेदी 1 | ||
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1पी.एच.-डी.(राजनीति विज्ञान) मगध विश्वविद्यालय, बोधगया |
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| Abstract | ||
प्रजातंत्र में चुनाव का अपना विशेष महत्व होता है। प्रजातंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। प्रजातांत्रिक प्रणाली में चुनाव की स्वतंत्रता व निष्पक्षता का दायित्व चुनाव आयोग पर होता है। इस वास्तविकता को ध्यान में रखते हुए संविधान-निर्माताओं ने भारतीय संविधान के भाग-15 के अंतर्गत अनुच्छेद 324 में एक स्वतंत्र निर्वाचन आयोग के गठन की व्यवस्था की है। चुनाव आयोग को चुनाव से सम्बन्धित निर्वाचक नामावली तैयार कराने तथा सभी निर्वाचनों के संचालन का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण का कार्यभार सौंपा गया है। चूंकि निष्पक्ष निर्वाचन व निर्वाचन-प्रणाली में सुधार प्रजातांत्रिक व्यवस्था का आधार है। प्रजातंत्र में चुनाव प्रक्रिया जितनी निष्पक्ष एवं विश्वसनीय होगी, उतना ही प्रजातंत्र को स्थायित्व व वैधता प्राप्त होगी। यही कारण है कि प्रथम आम चुनाव के समय से ही चुनाव सुधार बुद्धिजीवियों के लिए चिंतन का विषय बना रहा है। भारत में मौलिक अनुसंधानों के आधार पर निर्वाचन-प्रणाली को सरल, सहज, स्वीकार्य एवं ग्राह्य बनाया जा सकता है तथा भविष्य में प्रजातांत्रिक व्यवस्था के सुचारू रूप से संचालन में आने वाले बाधक तत्वों की पहचान कर उसके समाधान निकाले जा सकते है। चुनाव आयोग ने 2019 में विश्व की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक व्यवस्था में सफलतापूर्वक चुनाव सम्पन्न कराया। भारत का 17 वां आम चुनाव सात चरणों में पूर्ण हुआ, जिसमें चुनाव आयोग की उल्लेखनीय भूमिका ने भारत के साथ-साथ विश्व समुदाय का ध्यान अपनी ओर आकृष्ट किया। |
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| Keywords | ||
| प्रजातंत्र राजनीतिक लोकतंत्र | ||
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