व्यक्तिगत सत्याग्रह में सिवनी जिले का अवदान
| Vol-5 | Issue-10 | October-2020 | Published Online: 15 October 2020 PDF ( 520 KB ) | ||
| DOI: https://doi.org/10.31305/rrijm.2020.v05.i10.014 | ||
| Author(s) | ||
डाॅ. संकेत कुमार चौकसे
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1सहायक प्राध्यापक इतिहास, राजमाता सिंधिया शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, छिन्दवाड़ा |
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| Abstract | ||
व्यक्तिगत सत्याग्रह भारतीय स्वाधीनता आंदोलन की श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण कड़ी है। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान ब्रिटिश शासन और कांग्रेस के मध्य ‘पूर्ण स्वतंत्रता’ के प्रश्न पर कोई समझौता नहीं हो सका। अतएव महात्मा गांधी के नेतृत्व में यह आंदोलन संचालित किया गया। यह आंदोलन गांधीजी द्वारा किये गये अन्य आंदोलनों से भिन्न प्रकृति था। यह किसी प्रकार का जन आंदोलन नहीं था जिसमें व्यक्ति सामूहिक रूप से ब्रिटिश कानूनों का उल्लंघन करे। अपितु यह एक व्यक्तिगत प्रयास था जिसके अंतर्गत गांधीजी द्वारा चयनित सत्याग्रही जनसमूह के समक्ष युद्ध विरोधी नारे अथवा भाषण प्रस्तुत कर गिरफ्तार होने तक सत्याग्रह करता रहता था। यह आंदोलन लगभग 14 माह की दीर्घ अवधि तक अपूर्व उत्साह से संचालित किया गया जिसमें जमनालाल बजाज जैसे उद्योगपति से लेकर ग्रामीण क्षेत्र के साधारण कृशक तक समाज के हर वर्ग ने महत्वपूर्ण योगदान देकर इसे सफल बनाया। प्रस्तुत शोध पत्र में व्यक्तिगत सत्याग्रह की पृष्ठभूमि एवं घटनाओं पर प्रकाश डाला गया है। साथ ही इस सत्याग्रह में सिवनी जिले के अवदान को बतलाया गया है। |
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| Keywords | ||
| व्यक्तिगत सत्याग्रह | ||
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