लिंगदोह समिति एवं छात्र संघ चुनाव

Vol-5 | Issue-9 | September-2020 | Published Online: 15 September 2020    PDF ( 133 KB )
DOI: https://doi.org/10.31305/rrijm.2020.v05.i09.042
Author(s)
यशवंत वरकरे 1

1शोधार्थी इतिहास विभाग डाॅ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर (म.प्र.)

Abstract

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 19 सितम्बर, 2005 को केरल उच्च न्यायालय के निर्णय को चुनौती देने वाली केरल विश्वविद्यालय द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए, केन्द्र सरकार को निर्देश दिया कि वह देश के छात्र संघ चुनावों के बारे में दिशा निर्देश देने के लिए पूर्व न्यायाधीश या पूर्व चुनाव आयुक्त के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन करे। आदेश अनुसार मानव संसाधन मंत्रालय ने न्यायालय के निर्देशानुसार भारत के पूर्व चुनाव आयुक्त जेम्स माइकल लिंगदोह के नेतृत्व में एक छह सदस्यीय समिति का गठन किया। जिनकी प्रमुख सिफारिशें निम्नप्रकार से हैं-
 उम्मीदवार की उपस्थिति न्यूनतम 75 फीसदी हो। न्यूनतम अंक प्रतिशत भी तय हो तथा वह नियमित विद्यार्थी हो।
 प्रत्याशी का कोई आपराधिक रिकार्ड नहीं हो।
 प्रत्याशी का चुनाव खर्च 5 हजार से ज्यादा नहीं हो।
 परिणाम की घोषणा के दो सप्ताह के भीतर उम्मीदवार खर्च के ब्योरे की अपनी आॅडिटेड रिपोर्ट विश्वविद्यालय/काॅलेज प्रशासन को सौंपेगा।
लिंगदोह कमेटी के सिफारशिों के बाद भारत के विश्वविद्यालयों में छात्र संघ चुनाव की नई रूप रेखा तैयार की गई जिस का छात्रों द्वारा समर्थन व विरोध किया गया। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद 2007 से देश के सभी विश्वविद्यालयों में लिंगदोह समिति की सिफारिशों के आधार पर ही छात्र संघ चुनाव प्रारंभ हुये।

Keywords
छात्र संघ, विश्वविद्यालय, राजनैतिक पार्टी, छात्र राजनीति, सर्वोच्च न्यायालय
Statistics
Article View: 583