आधुनिकता के संदर्भ में राम कथा एवं कृष्ण कथा का वैश्विक परिपेक्ष्य नई शिक्षा नीति और हिंदी भाषा
| Vol-2 | Issue-9 | September 2017 | Published Online: 15 September 2017 PDF ( 142 KB ) | ||
| Author(s) | ||
| डॉ. गीता सहाय 1 | ||
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1हिन्दी विभाग, गया काॅलेज, गया |
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| Abstract | ||
किसी देश की शिक्षा नीति, भाषा, साहित्य अंतरूसम्बंधित होने के साथ-साथ उस देश की सामाजिक - सांस्कृतिक अस्मिता के परिचायक होते हैं। आधुनिक भौतिकतावादी युग में हमारे भारतीय समाज में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव दृष्टिगोचर हुए हैं। आज हमारे देश की परिस्थिति, आवश्यकताएँ बदल गई है। जिसमें आवश्यकता ऐसे नेतृत्व की है जो राष्ट्र के नागरिकों व सम्पूर्ण मानव जाति का सही दिशा में मार्गदर्शन कर सके। आज हम अपने पुरातन आदर्शों, संस्कृति से भटकते जा रहे हैं। वस्तुतः आज हमारे सम्मुख छात्रों में असंतोष, अनुशासनहीनता, बेरोजगारी, निर्धनता, वर्ग संघर्ष आदि अनुत्तरित समस्याएँ दिन - पर- दिन बढ़ती जा रही हैं। आवश्यकता है कि हिन्दी भाषा को इतना सबल बनाने की जो भारत के सभी नागरिकों को एकता के एक सूत्र में बाँध सके। ऐसे साहित्य की जो लोगों का सही मार्गदर्शन कर सके और ऐसी नई शिक्षा नीति की जो आज के समय की माँग को पूरा कर सके। वसुधैव कुट्म्बकम की भावना मानव के मन में जागृत कर सके। आज आवश्यकता है श्री कृष्ण जैसे युग गुरु की और राम के आदर्शों को जीवन में अपनाने की जिससे मानव जाति का, सम्पूर्ण विश्व का कल्याण हो सकें। इसलिए नई शिक्षा नीति और हिंदी भाषा का आधुनिकता के संदर्भ में राम कथा एवं कृष्ण कथा का वैश्विक परिपेक्ष्य |
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