मालवांचल के लोकजीवन में व्याप्त स्वास्थ्यपरक केवाता

Vol-5 | Issue-8 | August-2020 | Published Online: 17 August 2020    PDF ( 811 KB )
DOI: https://doi.org/10.31305/rrijm.2020.v05.i08.026
Author(s)
डाॅ. रचना जैन 1

1पी.डी.एफ. शोधार्थी, हिन्दी अध्ययनषाला, विक्रम विष्वविद्यालय, उज्जैन (म.प्र.)

Abstract

‘जैसा मन वैसा तन‘ अर्थात् शरीर और मन की स्वच्छता एक-दूसरे पर आधारित है। मनुष्य को चाहे सुन्दर रूप, धन-दौलत और सृष्टि की अपार सम्पदा ही क्यों न मिल जाये लेकिन इसका सदुपयोग तभी कर सकता है, जब वह शारीरिक और मानसिक रूप पूर्णतः स्वच्छ रहें। कहा भी गया है ‘स्वस्थ्य शरीर में मन और स्वस्थ्य मन में परमात्मा का निवास होता है।‘ मन के शुद्ध होने पर करूणा, दया, प्रेम, वात्सलय आदि गुण सहज ही आ जाते हैं।

Keywords
केवाता (कहावत), लोकजीवन, स्वास्थ्य, खानपान, मालवांचल, व्यायाम, रहन-सहन इत्यादि।
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