सूफीमत बनाम राजसत्ता

Vol-5 | Issue-7 | July-2020 | Published Online: 30 July 2020    PDF ( 118 KB )
DOI: https://doi.org/10.31305/rrijm.2020.v05.i07.030
Author(s)
गजेन्द्र कुमार 1

1शोधर्थी, हिन्दी विभाग, राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर

Abstract

सूफीमत का सम्बन्ध शामी विचारधारा से प्रभावित इस्लाम से है। इस्लाम अपने उदयकाल से ही न केवल धार्मिक वरन् मूलतः राजनीतिक व्यवस्था है। “मुहम्मद का उद्देश्य केवल धार्मिक नहीं था यहूदी पैगम्बरों के बारे में भी वह जानते थे, कि धर्म और शासन दोनों को वह अपने हाथों में रखते थे। इसके अतिरिक्त वह अपनी अरब जाति की दुर्दशा से भी खिन्न थे।....अरब के रेगिस्तान में बिखरी हुई शक्ति के महत्व को उन्होंने जल्दी समझ लिया और यह भी देख लिया कि यहूदी पैगम्बरों की तरह एक धार्मिक राजनीतिक व्यवस्था के अधीन उन्हें एकत्रित किया जा सकता है। चालीस की उम्र तक पहुँचते उन्हें मालूम हो गया था कि यहूदी या ईसाई जैसे पराये धर्म की सहायता से अरबों को एकता के सूत्र में नहीं बाँधा जा सकता न अरबों की राजनीतिक सामाजिक दुर्बलताओं को दूर किया जा सकता है। यह प्रधान कारण था जो कि यहूदी और ईसाई धर्म के प्रमाण मानते हुए भी मुहम्मद ने एक नये धर्म (इस्लाम) का प्रचार किया।’’1

Keywords
हूदी पैगम्बरों, धार्मिक, इस्लाम, अनुयायियों, अरबी कुरान, अरबी दीक्षा
Statistics
Article View: 613