दक्षिण चीन सागर एवं हिन्द महासागर के सदंर्भ में भारत-चीन समुद्री कूटनीति का बदलता स्वरूप
| Vol-5 | Issue-7 | July-2020 | Published Online: 25 July 2020 PDF ( 146 KB ) | ||
| DOI: https://doi.org/10.31305/rrijm.2020.v05.i07.023 | ||
| Author(s) | ||
Dr. Shyam Mohan Agrawal
1;
Dr. Sanjay Kumar Sharma
2
|
||
|
1Associate Professor, Department of Political Science, University of Rajasthan 2Post-Doctoral Fellow, Political Science, ICSSR, DELHI |
||
| Abstract | ||
दक्षिणी चीन सागर में चीन का जोखिम महत्त्वपूर्ण है। चीन, ताईवान, वियतनाम, मलेशिया, बुनेई और फिलीपीन्स के दक्षिण चीन सागर में राज्यक्षेत्रीय और क्षेत्राधिकार के दावें है। खासतौर से क्षेत्र में संभावित गैस और तेल के दोहन के लिए। इस क्षेत्र में जहाजों की स्वतंत्र आवाजाही भी एक मुद्दा है। खासतौर से अमेरिका और चीन के बीच, चीन के 200 मील विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य जहाजों के संचालन को लेकर है। न केवल दोनों देशों के मध्य तनाव बढ़ रहा है, बल्कि तनाव को हवा भी दी जा रही है। हिंद महासागर पर प्रभुत्व बढ़ाने हेतु चीन ने भारत के चारों ओर एक चक्रव्यूह बना रखा है, जिसमें चीन पाकिस्तान को एक कड़ी के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। हिन्द महासागर तक पहुँच बनाने के लिए चीन पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह को आधुनिक तकनीकी द्वारा सी पोर्ट के रूप में विकसित कर चुका है। |
||
| Keywords | ||
| जलडमरूमध्य, आधुनिकीकरण, शिन्हुआ, शांगरी ला वार्ता, नाइन डैश लाइन, वाणिज्यिक, कम्युनिस्ट पार्टी | ||
|
Statistics
Article View: 570
|
||


