सामाजिक न्याय सिद्धान्त: विभिन्न दृष्टिकोण
| Vol-4 | Issue-12 | December 2019 | Published Online: 16 December 2019 PDF ( 119 KB ) | ||
| Author(s) | ||
जितेन्द्र कुमार वर्मा
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1शोधार्थी, राजनीति विज्ञान विभाग, राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर |
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| Abstract | ||
सामाजिक न्याय एक आधुनिक विचार है जिसे अठारहवीं सदी के ज्ञानोदय और अमेरिकी व फ्रांसीसी क्रांतियों ने प्रकाशित किया है। यह विचार राजनीतिक विवादों से घिरा हुआ है। परिणामस्वरूप इसे कुछ अच्छा तो कुछ बुरा मानते हैं। सामाजिक न्याय की अधिकांश चर्चा में अन्याय के निवारण को केन्द्र में रखा जाता है। लेकिन यह विचार इससे अधिक की मांग करता है जिसमें न्यायी समाज पर ध्यान दिया जाता है। इसमें आधरभूत प्रश्न मानव प्रकृति और सामाजिक सम्बन्ध है यह संसाधन, शक्ति, स्टेटस अधिकार व अवसर के वितरण से जुड़ा हुआ है जिसमें वितरण के निर्णय किस प्रकार होंगे, यह पक्ष भी शामिल है। अतः सामाजिक न्याय की परिभाषा विशेष संदर्भ की मांग करती है। डेविड मिलर ने इससे सम्बन्धित तीन सिद्धान्त बताये हैं - आवश्यकता, अधिकार व डेजर्ट के अनुसार। आवश्यकता आधारित सिद्धान्त मानवीय जीवन की बुनियादी आवश्यकता पर ध्यान देता है। अधिकार आधारित सिद्धान्त परिणामों पर ध्यान नहीं देकर प्रक्रिया को महत्वपूर्ण मानते हैं। डेजर्ट आधारित सिद्धान्त के रूढ़िवादी विचारक समर्थक हैं जो प्राकृतिक न्याय को मानते हैं। |
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| Keywords | ||
| सामाजिक न्याय, आवश्यकता, अधिकार, डेजर्ट। | ||
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