बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत-नेपाल सम्बन्धः एक समीक्षा
| Vol-4 | Issue-8 | August 2019 | Published Online: 16 August 2019 PDF ( 660 KB ) | ||
| Author(s) | ||
एस0 सी0 श्रीवास्तव
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1रक्षा अध्ययन विभाग, जे0 पी0 पी0 जी0 कालेज, वाराणासी.-यू0पी0.-221302 |
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| Abstract | ||
हिमालय की गोद में बसा नेपाल भारत और चीन के बीच स्थित है। इसकी उत्तर की सीमा तिब्बत से मिलती है तथा इसकी पूर्व -पश्चिम व दक्षिण की पूरी सीमा भारत से मिलती है। यह एक हिमालयी राज्य है तथा इसकी जनसंख्या 1करोड़ से अधिक है। अतः इसे मध्यवर्ती देश (BUFFER)कहा जा सकता है।भारत के साथ इसकी सीमा की लम्बाई 600 मील है। यह विश्व का एक मात्रा हिन्दू राज्य है जहा काफी समय तक राज तन्त्र बना रहा। यहाॅ के नरेश अपने देश में श्पंचायती व्यवस्था‘‘ को ही जनाधार मानते रहे है। नेपाल में पंचायत राज प्रणाली कुल मिलाकर राज तन्त्र के नियन्त्रण में ही कार्य करती रही। नेपाल की जनता 20साल से अधिक समय तक पंचायती राज में जीने की अभ्यस्त हो चुकी थी। सन् 1950 से पूर्व नेपाल में राणाशाही थी ,परन्तु भारत के सहयोग से ही इसका अन्त हुआ। 30 जुलाई 1950 को भारत एवं नेपाल के बीच ‘‘मित्रता एवं सहयोग‘‘ की एक सन्धि की गई। परन्तु सन् 1954 से सन् 1956 तक नेपाली कांग्रेस का रूख भारत विरोधी बना रहा। टंका प्रसाद आर्चाय के युग में ही नेपाल एवं चीन काफी करीब आगये। इन्ही के कार्यकाल में ही नेपाल एवं चीन के बीच तिब्बत के सम्बन्ध में एक सन्धि की गई। आर्चाय ने तो यहाॅ तक कह डाला कि भारत नेपाल को अपने एक अनुयायी के रूप में परिवर्तित करने की योजनो बना रहा है। अक्टूबर 1956 डाॅ0 राजेन्द्र प्रसाद ने नेपाल की यात्रा की। वहाॅ पर उन्होने यह स्पष्ट किया कि नेपाल में भारत की कोई क्षेत्रीय महत्वाकांझाये नही है तथा यदि नेपाल की सुरक्षा को कोई खतरा उपन्न होता है तो यह भारत की सुरक्षा के लिये भी उतना ही गम्भीर खतरा माना जायेगा। |
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| Keywords | ||
| मित्रता एवं सहयोग, सन्धि, खतरा, शक्ति | ||
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