दर्शनः अर्थ एवं स्वरूप
| Vol-4 | Issue-7 | July 2019 | Published Online: 15 July 2019 PDF ( 180 KB ) | ||
| Author(s) | ||
अमनदीप शर्मा
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1शोधार्थी भाषा विज्ञान एवं पंजाबी कोशकारी विभाग पंजाबी विश्वविद्यालय, पटियाला (पंजाब) |
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| Abstract | ||
दर्शन शब्द संस्कृत के ‘दृश’ धातु से बना है जिसका शाब्दिक अर्थ देखना अथवा जानना है। अंग्रेजी में दर्शनशास्त्र को Philosophy कहा जाता है जो 'Philos' तथा 'Sophia' नामक यूनानी शब्दों के मेल से बना है। दर्शन के अन्तर्गत प्रमाण शास्त्र, विश्व-विज्ञान, आत्मतत्व दर्शन, ईश्वरीय तत्व, मूल्य विज्ञान, समाज दर्शन, आदि अनेक विषय है। इस प्रकार दर्शन शास्त्र का क्षेत्र बहुत विस्तृत हैं जिसको जानने के लिए कड़े परिश्रम और चिन्तनमनन की गहन आवश्यकता है। |
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| Keywords | ||
| दर्शन, प्रमाण शास्त्र, विश्व विज्ञान, आत्मतत्व दर्शन, ईश्वरीय तत्व, मूल्य विज्ञान, समाज दर्शन, इत्यादि। | ||
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