आकाशवाणी: संगीत के संदर्भ में
| Vol-4 | Issue-6 | June 2019 | Published Online: 12 June 2019 PDF ( 108 KB ) | ||
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डाॅ ऋचा
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1असिस्टेंट प्रोफेसर (संगीत गायन) श्री लाल नाथ हिन्दू काॅलेज, रोहतक - 124001 |
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| Abstract | ||
आकाशवाणी पर प्रसारण से पूर्व संगीत का एक विस्तृत दायरा नहीं था। वह या तो रियासतों में बंद था या लोक कला के रुप में पनप रहा था। दोनों ही स्थितियों में इसका दायरा बहुत संकुचित था। अलग-अलग रियासतों में अलग-अलग घरानों के संगीतज्ञों का पोषण होता था तथा लोक संगीत अपने-अपने गांवों, कस्बों आदि के सीमित दायरे में रहता था। आकाशवाणी की भारतीय मंच पर पुराने दिग्गजों तथा होनहार युवा कलाकारों के लिए अवसर दाता के रुप में प्रस्तुति हुई। इससे संगीतज्ञ अपनी कला में अधिक निखार ला सके और अधिकाधिक लोगों के खाली समय में मनोरंजन के लिए उनके घरों में संगीत पहुंचाने में सफल हुए। इस नव प्राप्त संरक्षण से कलाकारों को आज़ादी एवं राहत की एक नई साँस मिली। भारत में समूल्य आयोजनों की अनुपस्थिति ने भी संरक्षक के रुप में आकाशवाणी की महत्ता को बढ़ावा दिया। यह सत्य है, कि मद्रास तथा कुछ अन्य नगरों में सशुल्क समायोजन किए जाते थे, पर शेष भारत में ऐसा नहीं था। संगीत और संगीतज्ञों को देश के कोने-कोने तक पहुंचाने में आकाशवाणी ने एक सशक्त माध्यम की भूमिका निभाई। लोगों के अकेलेपन को कम करने के लिए संगीत के प्रसारण ने मनोरंजन के एकमात्र प्रमुख स्त्रोत का काम किया। आज आकाशवाणी एक तरह से विशालतम संगीत भवन है। भारत में सबसे बड़ा सांगीतिक मंच और व्याख्यान मंदिर है। लाखों घरो में सुबह से रात तक लगातार मनोरंजन के रुप में विभिन्न संगीतमय आवाज़ें सुनी जा सकती हंै। आकाशवाणी द्वारा शास्त्रीय संगीत, सुगम संगीत, लोकसंगीत भक्ति संगीत, वाद्य संगीत के कार्यक्रम प्रसारित होते हंै। आकाशवाणी द्वारा संगीत प्रतियोगिताओं व संगीत सम्मेलनों का आयोजन समय≤ पर किया जाता है। विभिन्न केन्द्रों पर संगीत सभाएं भी आयोजित की जाती हंै। संगीत की सभी विद्याओं को आकाशवाणी ने एक अलग पहचान दी है। |
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| Keywords | ||
| आकाशवाणी, संगीत, इतिहास, जनमानस, विकास | ||
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