औद्योगिक क्रांति 4.0 – भारत की भूमिका

Vol-4 | Issue-04 | April 2019 | Published Online: 15 April 2019    PDF ( 126 KB )
Author(s)
Anand Kumar 1; Prof. Somesh Kumar Shukla 2

1Research Scholar, Department of Commerce, Lucknow University, Lucknow (India)

2Dean Commerce Faculty, Department of Commerce, Lucknow University, Lucknow (India)

Abstract

 उद्योगों एवं तकनीकों ने आज इंसान की जिंदगी को बेहद आसान बना दिया है । प्राचीन समय में हम इसकी कल्पना भी नहीं कर सकते थे । लेकिन जैसे-जैसे जरूरतें बढ़ी इंसान ने कल कारखानों का चेहरा भी बदला, उद्योग धंधों के इसी क्रमिक विकास को हम औद्योगिक क्रांति कहते हैं । अंग्रेजी राज्य में भारत इतना सौभाग्यशाली नहीं रहा कि औद्योगिक क्रांति की  शुरूआती फायदों का लाभ ले सके।पहली और दूसरी औद्योगिक क्रांति जब हुई तब देश अंग्रेजों के अधीन था, यानी भारत आजाद नहीं था ।तीसरी औद्योगिक क्रांति के वक्त भारत आजादी की चुनौतियों से जूझ रहा था । लेकिन बीते सात दशकों में भारत ने दुनिया के सामने विकास का एक ऐसा मॉडल पेश किया है जो समावेशी होने के साथ-साथ टिकाऊ भी है । भारत के पास ऐसी युवा शक्ति और इनोवेशन का पावर हाउस है, जिसके बलबूते वह चौथी औद्योगिक क्रांति की अगुवाई एवं प्रतिस्पर्धा के लिए बिल्कुल तैयार है । दुनिया में चौथी औद्योगिक क्रांति की शुरुआत हो चुकी है जिस में भारत भी भूमिका निभाने को तैयार है । सैन फ्रांसिस्को, टोक्यो, बीजिंग के बाद WEF यानी वर्ल्ड इकोनामिक फोरम ने मुंबई में दुनिया का चौथा सेंटर खोला जा रहा है। जिसका औपचारिक ऐलान प्रधानमंत्री ने किया । आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मशीन, लर्निंग ब्लॉकचेन, बिग डाटा, और ऐसी तमाम नई तकनीकों में भारत के पास न सिर्फ कौशल है बल्कि अपार संभावनाएं हैं, और चौथी औद्योगिक क्रांति न सिर्फ विकास को नई ऊंचाई पर ले जाने रोजगार के लाखों नए अवसर बनाने और देश के प्रत्येक व्यक्ति के जीवन को बेहतर बनाने की क्षमता है बल्कि इसे सामाजिक परिवर्तन के आधार के तौर पर भी देखा जा रहा है1­ ।

Keywords
औद्योगिक क्रांति, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ब्लॉकचेन तकनीक, मानवरहित एयरक्राफ्ट सिस्टम, बायोइंजीनियरिंग, नैनोटेक्नोलॉजी, स्मार्ट फैक्ट्री
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