हिन्दी गद्य साहित्य में नाटक की उत्पत्ति

Vol-4 | Issue-03 | March 2019 | Published Online: 13 March 2019    PDF ( 221 KB )
Author(s)
डाॅ0 बबीता रावत 1
Abstract

भारतीय मनीषियों ने कला को मनोरंजन और षिक्षा तक ही सीमित रखा, किन्तु पाष्चात्य पण्डितों ने कला को जीवन के अध्यात्म से सम्बन्धित किया। कलावादियों का यह तर्क है, कि नाटक मनोरंजन का साधन है, किन्तु साथ-साथ इसमें तथ्य की मात्रा समूची रहनी चाहिए। हाँ तथ्य के प्रगट करने के साधनों में कला की पूर्ण सहायता ली जा सकती है। इन लोगों का विष्वास है कि संसार स्वयं संर्घष और द्वन्द का क्षेत्र है, मनुष्य चारों ओर अनेक वैषम्यों को मित्य देखता भोगता चला आ रहा है इसलिए उन्हें देखने तथा सहन करने का अभ्यास हो गया है। इन कलावादियों का यह प्रस्ताव है कि नाटक में विनोद के कलात्मक साधनों अर्थात् गीत नृत्य और नृत्य का प्रचुर प्रयोग किया जाए। नाटक को जीवन का आधार माना जाता है।

Keywords
कला मनोरंजन नाटक
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