लोकतांत्रिक समाजवाद का नेहरूवादी दृष्टिकोण एवं उपादेयता
| Vol-4 | Issue-03 | March 2019 | Published Online: 13 March 2019 PDF ( 119 KB ) | ||
| Author(s) | ||
| कमल सिंह 1 | ||
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1शोधार्थी - इतिहास विभाग, राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर |
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| Abstract | ||
नेहरू की समाजवाद की अवधारणा में लोकतंत्र के विचार का केन्द्रीय स्थान है, यह भी कहा जा सकता है कि लोकतंत्र उनकी समाजवादी धारणा का प्रारम्भिक बिन्दु है और अंतिम भी। वस्तुतः लोकतंत्र एक ऐसा तथ्य है जो मावर्तवादी समाजवाद से उनके समाजवाद की भिन्नता को भी प्रकट करता है। नेहरू ने लोकतंत्र को एक गतिशील अवधारणा तथा नैतिक जीवन-दृष्टि के रूप में स्वीकारा है। उनकी लोकतंत्र की अवधारणा बहु-आयामी है, जो राजनीतिक लोकतंत्र से क्रमशः सामाजिक लोकतंत्र तथा आर्थिक लोकतंत्र की दिशा में विकसित होती है। नेहरू ने आर्थिक लोकतंत्र के विशिष्ठ रूप को लोकतांत्रिक समाजवाद कहा है। |
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| Keywords | ||
| जनवाद, नागरिक अधिकार, आत्मनिर्भर, भारतीय राष्ट्र, अर्थव्यवस्था, लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता, निर्वाचन, समाजवाद आदि। | ||
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