अमृतराय के व्यक्तित्व एवं कृतित्व का अध्ययन

Vol-3 | Issue-02 | February 2018 | Published Online: 28 February 2018    PDF ( 875 KB )
Author(s)
Dr.Sapna Gupta 1
Abstract

व्यक्ति के सम्पूर्ण जीवन का नाम ही साहित्य है। साहित्य का जन्म इसी जीवन में होता है और विकास भी। जीवन में भोगे हुए तत्वों और किए हुए अनुभवों को ही समाजवेत्ता साहित्यकार साहित्य में स्थापित करता है। हिन्दी कथाकारों मंे अमृतराय का विषिष्ट स्थान है। प्रगतिषील विचारधारा के प्रमुख चिन्तक एवं कथाकारों में अमृतराय का नाम प्रथम पंक्ति में अंकित है। अमृतराय हिन्दी के कथा सम्राट मुन्षी प्रेमचन्द के कनिष्ठ पुत्र रहे हैं। साहित्यिक परिवेष में उनका बचपन बीता। उस परिवेष का प्रभाव उनके साहित्य पर स्पष्टतः पड़ा। प्रेमचन्द ने अपने साहित्य में जिस सामाजिक चेतना,वर्ग संघर्ष, धर्म और आधुनिक जीवन दृष्टि, भारतीय और पाष्चात्य जीवन षैली के टकराव,संस्कार और वैज्ञानिक दृष्टि सम्बन्धी जिन विसंगतियों को उठाया था उस परम्परा को आगे बढ़ाने में अमृतराय ने अपनी पूरी प्रतिबद्धता दिखाई। उन्होंने अपने साहित्य में मध्यवर्गीय जीवन की विडम्बनाओं के आगे जाकर निम्नवर्ग ,भूमिहीन श्रमजीवी ,सर्वहारा जीवन से तादात्म्य स्थापित कर उच्च वर्ग और सत्ता षोषण का प्रतिरोध किया है। इन सारे तथ्यों, संदर्भों एवं परिप्रेक्ष्य का विस्तार अमृतराय के कथा साहित्य में दृष्टिगोचर होता है।

Keywords
अमृतराय, व्यक्तित्व एवं कृतित्व, हिन्दी कथाकार, जीवनषैली
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