शेखावाटी में ठिकानों की भूमिकर प्रथा एवं लाग-बाग
| Vol-3 | Issue-10 | October 2018 | Published Online: 10 October 2018 PDF ( 119 KB ) | ||
| Author(s) | ||
| महेन्द्र कुमार 1 | ||
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1पीएच.डी. छात्र, राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर (राज.) |
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| Abstract | ||
बीतें कई दशकों से हमारे देश में किसान समुदायों पर ठिकानेदारों एवं जागीरदारों द्वारा शोषण किया जा रहा है। आम जनता व किसानों पर अनेक प्रकार के भू-राजस्व कर, भूमि से बेदखली व लाग-बाग बेगार आदि लादने का चक्रव्यूह चला आ रहा है। भारत में अंग्रेजी सत्ता का एक प्रमुख अंग भारतीय कृषि व्यवस्था को प्रभावित करना रहा है। इसके फलस्वरूप प्राचीन कृषि व्यवस्था नवीन प्रशासनिक ढांचे के अधीन शनैः शनैः टूटती चली गयी। इसी के साथ नई भू-बन्दोबस्त, भूमिकर प्रथा व लाग-बाग व्यवस्था ने नए प्रकार के भूस्वामी पैदा कर दिए।किसानों के पास जीवनोपार्जन के अन्य स्त्रोत कम होने के कारण भूमि के ऊपर भार अधिक बढता गया और भूमि की कीमते भी बढ़ गई। ठिकानेदारों तथा जागीरदारों का भाग अत्यधिक होने के कारण किसान साहुकारों तथा जमींदारों के चुंगल में फसता चला गया। अनुपस्थित भूस्वामित्व, परजीवी बिचैलिए, लोभी, साहूकार इन सभी ने मिलकर किसान को अत्यधिक निर्धनता के गर्त में धकेल दिया। अतः अब किसान को विदेशी ही नहीं, अपितु स्थानीय शोषणाकारियों से भी निबटना था। |
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| Keywords | ||
| भू-बन्दोबस्त, भूमिकर प्रथा व लाग-बाग व्यवस्था | ||
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